आगरा। शहर के थाना लोहामंडी क्षेत्र के राजामंडी बाजार में नकली किताबों के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। तीन प्रतिष्ठित प्रकाशनों एमसी ग्रेव हिल एजुकेशन, जेपी ब्रदर्स मेडिकल पब्लिशर्स और स्पेक्ट्रम बुक्स प्रा. लिमि. की शिकायत पर पुलिस ने मानव बुक डिपो, राजा मंडी चौराहा पर छापेमारी की और बड़ी मात्रा में फर्जी किताबें बरामद कीं।
आगरा। शहर के थाना लोहामंडी क्षेत्र में नकली किताबों के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। तीन प्रतिष्ठित प्रकाशनों एमसी ग्रेव हिल एजुकेशन, जेपी ब्रदर्स मेडिकल पब्लिशर्स और स्पेक्ट्रम बुक्स प्रा. लिमि. की शिकायत पर पुलिस ने मानव बुक डिपो, राजा मंडी चौराहा पर छापेमारी की और बड़ी मात्रा में फर्जी किताबें बरामद कीं।
इन प्रकाशनों के अधिकृत प्रतिनिधि संजय कुमार राघव द्वारा दी गई तहरीर पर दुकान मालिक संजय अग्रवाल के खिलाफ ट्रेडमार्क और कॉपीराइट एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
ऐसे चला पता नकली किताबों के रैकेट का
प्रकाशन कंपनियों को लंबे समय से संदेह था कि बाजार में उनकी पुस्तकों की नकली प्रतियां धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। जांच पड़ताल में पता चला कि आगरा के राजा मंडी स्थित मानव बुक डिपो से असली किताबों की जगह नकली कॉपियां तैयार कर बेचने और उन्हें देशभर के थोक किताब विक्रेताओं तक सप्लाई करने का काम किया जा रहा था। इससे प्रकाशकों को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था, वहीं सरकार को भी टैक्स में भारी चपत लग रही थी।
पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई
तहरीर मिलते ही थाना लोहामंडी प्रभारी ने एक विशेष पुलिस टीम गठित की। टीम ने प्रकाशन प्रतिनिधियों के साथ दुकान पर पहुंचकर तलाशी ली और मौके से कई लोकप्रिय व उच्च मांग वाली पुस्तकों की नकली प्रतियां बरामद कीं।
बरामद हुईं ये फर्जी किताबें
छापेमारी में जिन प्रमुख पुस्तकों की नकली कॉपियां मिलीं, उनमें शामिल हैं इंडियन पॉलिटी– एम. लक्ष्मीकांत, ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ मॉडर्न इंडिया– राजीव अहीर, एसेंशियल्स ऑफ़ मेडिकल फिजियोलॉजी– के. सेंबुलिंगम, फार्माकॉलोजी– केडी त्रिपाठी, पैथोलॉजी– हर्ष मोहन। इसके अलावा कई प्रतियोगी व मेडिकल पाठ्यपुस्तकों की प्रतियां भी जब्त की गईं। बरामदगी की सूची तैयार कर पुलिस अभिरक्षा में सौंप दी गई है।
नेटवर्क की जांच तेज
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे रैकेट की गहन जांच की जाए। किताबों की छपाई, सप्लाई चेन और वितरण में शामिल सभी व्यक्तियों को चिन्हित कर कार्रवाई हो। ताकि छात्रों, मेडिकल अभ्यर्थियों और आम जनता को नकली किताबों से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है और पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने में जुटी है।

