आगरा, 8 नवंबर। जिला उद्यान अधिकारी आगरा और उपनिदेशक उद्यान के अलावा निरीक्षक और एक बाबू के निलंबन के पश्चात उद्यान विभाग भगवान के भरोसे चल रहा है। शासन और निदेशालय स्तर से आलू बीज वितरण में गड़बड़ी के आरोप में आगरा से लेकर लखनऊ तक के चार अफसरों और एक लिपिक को निलंबित कर दिया गया है। इस तरह पांच अफसरों और कर्मचारियों पर प्रदेश के उद्यान विभाग में पहली बार इतनी बड़ी ताबड़तोड़ कार्रवाई शायद पहली बार की गयी है।
कार्रवाई को लगभग एक सप्ताह बीत गया है। इसके पश्चात आगरा का उद्यान विभाग भगवान के भरोसे चल रहा है। उनकी जगह न तो फिलहाल स्थानीय स्तर पर किसी को चार्ज दिया गया है और न ही लखनऊ से कोई भेजा गया है। जिलाधिकारी कार्यालय स्तर से भी अभी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी है। किसान भी अब बिल्कुल शांत बैठ गये हैं। जैसे कि अफसरों पर कार्यवाही के पश्चात उनकी सारी समस्याओं का समाधान हो गया हो।उद्यान विभाग में अब केवल उद्यान अधीक्षक रजनीश पांडे ही इकलौते अफसर हैं। उनसे पूछा गया कि फिलहाल उन्हें कोई चार्ज मिला है क्या, इस पर श्री पांडे का जवाब था कि उनको जिला उद्यान अधिकारी आगरा को सहयोग करने के आदेश जिला स्तर से दिये गये थे, लेकिन जब कोई डीएचओ ही नहीं है तो वे सहयोग किसका करें। इसके अलावा उनको कोई आदेश नहीं मिला है। उनका कहना है कि वे अपने उद्यान अधीक्षक का कार्य ही देख रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि विगत 6 नवंबर को इंस्पेक्टर संजीव यादव तथा लिपिक सुनील वर्मा को निलंबित किया गया था। इसके पश्चात आठ नवंबर को उपनिदेशक पोटेटो लखनऊ कौशल कुमार, उपनिदेशक उद्यान आगरा धर्मपाल सिंह, जिला उद्यान अधिकारी आगरा बैजनाथ सिंह को निलंबित किया गया। इनका कार्यभार किसको दिया गया, यह अभी तक किसी को नहीं पता है। किसानों के साथ जनप्रतिनिधि भी इस मामले में कुछ नहीं बोल रहे हैं। कुछ दिन और ऐसे ही चला तो तब तक आलू बुवाई का सीजन ही निकल जाएगा। इसलिये मामला साल भर के लिये अपने आप ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


