आकर्षक कथक संरचनाओं में समायी रामायण, दर्शक हुए भाव विभोर लोकनृत्यों में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

Press Release उत्तर प्रदेश

प्रयागराज, 10 फरवरी। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कुंभ की सांस्कृतिक संध्या में देश के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले तीर्थयात्री देश की विविधामय सांस्कृतिक झांकी देख आनंदित हो रहे हैं और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों की  हौसला अफजाई भी कर रहे हैं। सोमवार को सांस्कृतिक संध्या का प्रमुध आकर्षण बनारस घराने से संबंध रखने वाले अनुज मिश्रा एवं दल का शास्त्रीय नृत्य कथक रहा। उस्ताद बिस्मिलाह युवा पुरस्कार से पुरस्कृत अनुज मिश्रा ने अपनी प्रस्तुतियों में तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस पर आधारित कुशलव कथा को अभिनय के माध्यम से दर्शकों को भावपूर्ण नृत्य शैली के प्रति आकर्षित किया और अपनी अभिव्यक्ति, भावनात्मक प्रस्तुति और लयबद्ध गतियों से भगवान श्रीराम की गाथाओं को मंच पर जीवंत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रेम प्रकाश दुबे ने भजन से किया। उन्होंने मंगल भवन आ मंगल हारी राम सियाराम.. प्रयाग नगरी बसे संगम के तीरे, ओरी सखी मंगल गावो री, धरती अंबर सजाओ री की प्रस्तुति देकर श्रोताओं से तालियां बटोरी। लोकनृत्यों की कड़ी में पश्चिम बंगाल से आए महेश दास ने बाउल गायन से की। उड़ीस से आए बलराम रेड्डी एवं दल द्वारा शंख वादन की प्रस्तुति दी। इसके बाद शिव एवं साथी कलाकारों द्वारा पाईका नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों में वीर रस का संचार किया। हरियाणा से आए मनोज झाले द्वारा फाग नृत्य, प्रेम प्रकाश मेघावल एवं दल द्वारा भवई नृत्य, इसके अलावा धर काटले द्वारा तेलंगाना का खुम्भकोया नृत्य, कुलदीप गुलेरिया द्वारा हिमाचल प्रदेश का लुड्डी नृत्य, सीमा साईका एवं दल् द्वारा असम का जेंग बिहू नृत्य तथा उड़ीस के कलाकारों द्वारा गुबकुडू लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई, जबकि सायन बिस्वास द्वारा गाोकुल की रासलीला को कंटेम्परेरी (समकालीन नृत्य) के जरिए दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया। इस मौके पर केंद्र के प्रभारी निदेशक आशिस गिरि सहित काफी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

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