कचरे से कमाई का मॉडल: कुबेरपुर में प्लास्टिक से बन रहे उपयोगी उत्पाद

Press Release उत्तर प्रदेश


—– आगरा बना उत्तर प्रदेश में मिसाल, प्लास्टिक वेस्ट से सड़कों तक नवाचार की नई पहचान
—- दो वेस्ट प्लास्टिक से शू लास्ट और प्लास्टिक ग्रेनुअल का उत्पादन

आगरा। शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा देते हुए आगरा नगर निगम ने कुबेरपुर स्थित इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी में एक अत्याधुनिक एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसेलिटी) कम प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित यह पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का नया स्रोत भी बनकर उभरी है।
इस आधुनिक फैसिलिटी में शहर से निकलने वाले लो-वैल्यू प्लास्टिक वेस्ट जो आमतौर पर रीसायकल नहीं हो पाता को एकत्र कर उसे उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित किया जा रहा है। यहां से तैयार उत्पादों में सिंचाई के लिए पाइप, आगरा के प्रसिद्ध जूता उद्योग में प्रयुक्त होने वाले शू लास्ट और प्लास्टिक ग्रैन्यूल शामिल हैं।
खास बात यह है कि इन प्लास्टिक ग्रैन्यूल का उपयोग नगर निगम क्षेत्र में बनने वाली सड़कों में बिटुमिन के विकल्प के रूप में करीब 7 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इससे सड़कों की गुणवत्ता और मजबूती दोनों में सुधार हो रहा है, साथ ही प्लास्टिक वेस्ट का प्रभावी निस्तारण भी सुनिश्चित हो रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सहायक नगरआयुक्त अशोक प्रिय गौतम ने बताया कि यह परियोजना पूरी तरह से पीपीपी मॉडल पर आधारित है, जिससे नगर निगम पर किसी भी प्रकार का वित्तीय बोझ नहीं पड़ रहा है। संचालन और रखरखाव का पूरा खर्च निजी भागीदार द्वारा वहन किया जा रहा है, जबकि नगर निगम को इस परियोजना के शुद्ध लाभ का 20 प्रतिशत राजस्व के रूप में प्राप्त हो रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में इस परियोजना से लगभग 20 लाख रुपये के राजस्व की प्राप्ति का अनुमान है। यह पहल उत्तर प्रदेश की पहली ऐसी यूनिट मानी जा रही है, जहां म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट से सीधे बाजारोन्मुख उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
यह नवाचार न केवल शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ के सिद्धांत को भी मजबूती देता है, जिससे आगरा अन्य शहरों के लिए एक आदर्श मॉडल बनता जा रहा है।

नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल का वर्जन:
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि “कुबेरपुर स्थित यह फैसिलिटी आगरा को स्वच्छता और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दे रही है। लो-वैल्यू प्लास्टिक का इस तरह से पुनर्चक्रण कर उपयोगी उत्पाद बनाना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, बल्कि नगर निगम को राजस्व भी प्राप्त हो रहा है। भविष्य में इस मॉडल को और विस्तार देने की योजना है, ताकि अधिकतम कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।”

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