प्रश्न के विकल्प में “पण्डित” शब्द शामिल करना अनुचित और आपत्तिजनक
ऐसी हरकतें सामाजिक समरसता को बिगाड़ने का प्रयास
दोषी पेपर सेटर की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की मांग
किसी भी जाति, वर्ग या परम्परा के अपमान को स्वीकार नहीं किया जाएगा—मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय
लखनऊ, 15 मार्च । उत्तर प्रदेश पुलिस उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कड़ा ऐतराज व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न में “अवसर के अनुसार बदलने वाला” के लिए एक शब्द के विकल्पों में “पण्डित” शब्द दिया जाना न केवल अनुचित है, बल्कि इसका कोई औचित्य भी नहीं है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस प्रकार का प्रश्न और उसके विकल्प किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं और यह कृत्य किसी मानसिक विकृति से ग्रस्त पेपर सेटर द्वारा जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की हरकतें सामाजिक समरसता को प्रभावित करती हैं और वर्ग विशेष की भावनाओं को भी आहत करती हैं।
योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि किसी भी जाति, वर्ग या परंपरा से जुड़े शब्दों का इस प्रकार अपमानजनक संदर्भ में प्रयोग करना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में भी एक फिल्म के नाम को लेकर इसी प्रकार की आपत्तिजनक स्थिति सामने आई थी, जिसे समाज ने गंभीरता से लिया।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है और इसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान करना कठिन नहीं है। ऐसे में इस मामले की जांच कर संबंधित पेपर सेटर को चिन्हित कर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी समाज या वर्ग की भावनाओं को आहत करने वाली ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि सामाजिक सौहार्द और समरसता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है, इसलिए इस प्रकार की असंवेदनशीलता को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।


