
आगरा, 8 नवंबर। लखनऊ से लेकर आगरा तक उद्यान विभाग में आज अचानक भूचाल आ गया है। एक-दो नहीं पांच अधिकारी और कर्मचारी निलंबित किये गये हैं। इनमेें उपनिदेशक पोटेटो लखनऊ कौशल कुमार, उपनिदेशक उद्यान आगरा धर्मपाल सिंह, जिला उद्यान अधिकारी बैजनाथ सिंह को आज निलंबित किया गया है। जबकि इंस्पेक्टर संजीव यादव तथा लिपिक सुनील वर्मा को दो दिन पहले 6 नवंबर को ही निलंबित किया गया है।
आगरा में आलू बीज आवंटन को लेकर आलू उत्पादक किसानों द्वारा हंगामा किया गया था। हाथरस रोड को जाम किया गया। इसके पश्चात मामला लखनऊ तक पहुंचा। वहां से देवेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा आईएएस विशेष सचिव की अध्यक्षता में टीम आयी। जिसमें डा. सर्वेश कुमार संयुक्त निदेशक उद्यान सदस्य, डा. राजीव कुमार वर्मा संयुक्त निदेशक शाकभाजी समिति के सदस्य के रूप में आये। उनको किसान नेताओं श्याम सिंह चाहर, ताज आगरा आलू उत्पादक समिति के प्रदेश महासचिव लक्ष्मीनरायन बघेल, लाखन सिंह त्यागी आदि ने अपनी शिकायत लिखित में दर्ज करायी। जांच समिति की रिपोर्ट में तीन लोग दोषी बताये गये थे। जिनमें जिला उद्यान अधिकारी , इंस्पेक्टर और लिपिक शामिल हैं। दो को पहले ही निलंबित कर दिया गया। लेकिन आज जिला उद्यान अधिकारी के साथ दो उपनिदेशक भी निलंबित कर दिये गये हैं। इस कार्रवाई को लेकर उद्यान विभाग में खलबली मच गयी है। आगरा से लेकर लखनऊ तक तो खलबली मचनी ही थी, प्रदेश के पूरे उद्यान विभाग में चर्चा का विषय बन गया है।
इस संबंध में उपनिदेशक पोटेटो कौशल कुमार ने सिर्फ इतना कहा कि अभी उन्हें कोई लिखित आदेश नहीं मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि हमने तो जिलों से मांग के अनुरूप आलू बीज का आवंटन मेरठ और लखनऊ के माध्यम से किया है। रास्ते में अगर कोई ब्लैक कर दे तो हम इसमें क्या कर सकते हैं। वैसे निलंबन के विषय में उनसे विभागीय अधिकारियों द्वारा कुछ भी पूछा नहीं गया है। वहीं उपनिदेशक उद्यान आगरा डा. धर्मपाल सिंह शुक्रवार शाम को ही लखनऊ चले गये हैं। उनसे फोन पर वार्ता नहीं हो पायी है।
आलू बीज आवंटन में गड़बड़ी पर इतनी बड़ी कार्रवाई पर किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने आज ही उद्यान निदेशक बीपी राम से फोन पर वार्ता की। इनके अलावा आलू उत्पादक लक्ष्मीनरायन बघेल ने भी निदेशक उद्यान तथा जांच अधिकारी देवेंद्र सिंह कुशवाहा आईएएस से वार्ता की। उन्होंने इन अधिकारियों के निलंबन की जानकारी दी। किसान नेता श्याम सिंह चाहर का कहना है कि सींगना फार्म में आलू बीज खुदाई-बिनाई, छटाई में हुए घोटाले में दोनों उपनिदेशकों को निलंबित किया गया है। डीएचओ आगरा को आलू बीज वितरण घोटाले में सस्पेंड किया गया है। श्री चाहर ने कहा कि मेरे खिलाफ झूठी खबर फैलायी गयी कि 60 कुंतल आलू बीज मैं ले गया। जबकि यह साबित नहीं हो पाया। किसान नेता श्याम सिंह चाहर, लाखन सिंह त्यागी, सोमवीर सिंह यादव, दलीप सिंह ,लक्ष्मीनरायन बघेल, विशंभर सिंह ने जिलाधिकारी से लेकर लखनऊ तक के अधिकारियों से शिकायतें की थीं। जिन पर संज्ञान लेने के बाद ही यह कार्यवाही हुई है। अलीगढ़ में हुई गोष्ठी में भी सींगना आलू फार्म की शिकायतें की गयी थीं।
जांच समिति ने तीन के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गयी थी और निलंबित हुए पांच
लखनऊ से आयी जांच समिति ने जिला उद्यान अधिकारी समेत तीन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की थी। जिसमें कहा गया था कि आलू बीज वितरण से सम्बन्धित निर्गत शासनादेशों के क्रम में जिला उद्यान अधिकारी, आगरा द्वारा दिये गये निर्देश तथा सम्बन्धित कर्मचारी सुनील वर्मा के बयान से स्पष्ट है कि सुनील कुमार वर्मा, कनिष्ठ सहायक द्वारा कृषकों के आवेदन-पत्र आलू बीज पंजिका में अंकित करते हुए कृषकों को आवेदन संख्या उपलब्ध नहीं कराकर मनमाने ढंग से आधी अधूरी पंजिका तैयार करने के दोषी हैं।
अभिलेखों के निरीक्षण, शिकायतों तथा जिला उद्यान अधिकारी एवं संजीव कुमार, सहायक उद्यान निरीक्षक के बयान से स्पष्ट है कि प्रभारी 4401 का प्रभार होने के कारण संजीव कुमार, सहायक उद्यान निरीक्षक द्वारा शासनादेश/निदेशालय/जिलाधिकारी आगरा द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुपालन में राजकीय शीतगृहों से प्राप्त आलू बीज को जनपद तक सुरक्षित रूप से पहुँचानें एवं कृषकों को प्रथम आवक प्रथम पावक के आधार पर न करके पर्चियों के आधार पर वितरण करने तथा आलू बीज वितरण से प्राप्त धनराशि का लेखा-जोखा समुचित ढंग से न करने के साथ ही राजकीय शीतगृहों से रवाना ट्रकों को निर्धारित स्थल पर न उताकर रास्ते में ही अवैध रूप से वितरण हेतु दोषी हैं।
बैजनाथ सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, आगरा द्वारा शासन / निदेशालय के निर्देशानुसार राजकीय शीतगृहों से प्राप्त आलू बीज को जनपद तक सुरक्षित रूप से पहुँचानें, जनपद में आलू बीज पहुँचने से पूर्व वितरण हेतु चयनित कृषकों को बीज पहुँचाने की सम्भावित तिथि से अवगत न कराने, जिलाधिकारी, आगरा द्वारा गठित समिति से आलू बीज वितरण न कराकर पर्ची के माध्यम से कराने, आलू बीज क्रय करने वाले सम्बन्धित कृषकों को क्रय के समय ही नकद रसीद उपलब्ध न कराने एवं आलू बीज पंजिका में कृषकों के आवेदनों का विधिवत् अंकन तथा अभिलेखीकरण सही ढंग से न कराने एवं किसानों को आलू बीज प्रदान करने हेतु अवैध पर्चियों निर्गत करने तथा साथ ही राजकीय शीतगृहों से रवाना ट्रको को निर्धारित स्थल पर न उताकर रास्ते में ही अवैध रूप से वितरण हेतु पूर्ण रूप से दोषी हैं।
डा. धर्म पाल यादव, उप निदेशक उद्यान, आगरा जिन्हें शासन के नीति की व्यवस्था के अनुरूप आलू बीज वितरण की समीक्षा एवं अनुसरण किये जाने का दायित्व था, जिसके क्रम में आलू बीज वितरण हेतु जिला उद्यान अधिकारी की माँग पर अतिरिक्त कार्मिकों को उपलब्ध कराया गया, तथा जिला उद्यान अधिकारी को आवश्यक निर्देश प्रदान किये गये।
इस प्रकार जनपद आगरा में आलू बीज वितरण में स्वेच्छाचारिता, गैर पारदर्शी व मनमाने तरीके की प्रक्रिया अपनाई गयी, जिससे आलू उत्पादक कृषकों/ किसान संगठनों में रोष व्याप्त हुआ तथा उनके द्वारा धरना प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम की गयी। इस कृत्य से उत्तर प्रदेश शासन की छवि धूमिल हुयी, जिसमें बैजनाथ सिंह, जिला उद्यान अधिकारी, आगरा, संजीव कुमार, सहायक उद्यान निरीक्षक / प्रभारी 4401 तथा सुनील वर्मा, कनिष्ठ सहायक की दुरभिसंधि प्रमाणित हो रही है। इसलिये इनके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की गयी थी।
जांच रिपोर्ट में संस्तुति के बिना ही निलंबित किये दोनों उपनिदेशक
उपनिदेशक पोटेटो लखनऊ कौशल कुमार और उपनिदेशक उद्यान आगरा डा. धर्मपाल सिंह के खिलाफ किसी कार्रवाई की संस्तुति आईएएस देवेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा विशेष सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने नहीं की थी। इस टीम में डा. सर्वेश कुमार संयुक्त निदेशक उद्यान सदस्य, डा. राजीव कुमार वर्मा संयुक्त निदेशक शाकभाजी सदस्य के रूप में आगरा आये थे। इस समिति की रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव उद्यान बाबूलाल मीणा तक पहुंची। वहां से सरकार तक गयी, तब जाकर आज इन दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है। वैसे कार्रवाई के बाद ये अधिकारी भी अचंभित हैं। वे इस विषय में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। उपनिदेशक पोटेटो कौशल कुमार दो साल पहले आगरा में उपनिदेशक उद्यान के पद पर कार्यरत रहे हैं। उनके आगरा में तैनाती के दौरान ही सींगना में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र को मंजूरी मिली है। पेरू के इस सेंटर के लिये श्री कौशल ने दिल्ली और लखनऊ तक कई बार दौड़ लगायी थी। जनप्रतिनिधियों की भी उन्होंने मदद ली थी। यह पोटेटो सीड रिसर्च सेंटर भारत का पहला सेंटर है। जो पेरू की मदद से आगरा में खुलने जा रहा है। इसके लिये भारत सरकार ने लगभग 110 करोड़ का बजट भी मंजूर कर दिया है।
