संगीत,नृत्य और सांस्कृति के संगम से महाकुंभ के कलाग्राम में बही सांस्कृतिक बयार

Religion/ Spirituality/ Culture उत्तर प्रदेश

प्रयागराज, 24 जनवरी। महाकुंभ के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वार सांस्कृतिक कुंभ के तहत शुक्रवार को कलाग्राम में आयोजित लोकगीत, लोकनृत्य और भारतीय संस्कृति के अद्भुत संगम ने श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुजरात का डांडिया, रास-गरबा, राजस्थान का चरी, घूमर और पंजाब का भांगड़ा नृत्य ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में नई ऊंचाइयों को छुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत पंजाब से आए कलाकारों ने डफली, ढोल और तुनकार जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों पर भांगड़ा की प्रस्तुति देकर दर्शकों में ऊर्जा का संचार किया। इसके राजस्थान से आए हिदेश एवं साथी कलाकारों ने गरबा, डांडिया नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को खूब झुमाया। नेहा वैष्णव एवं दल ने चरी, घूमर नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद गोवा से आए दत्ता राम सावट द्वारा घोडे मोरनी तथा समई-देखड़ी नृत्य की प्रस्तुति देकर अपने सांस्कृतिक धरोहर का परिचय कराया। इसके बाद कोलकाता से आए विश्वदेव महतो एवं दल ने नटुआ नृत्य, पंजाभरी ने असम का डोमाही किकन नृत्य तथा उदय कुमार ने केरल का थेय्यम नृत्य की प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ से आए कलाकारों ने गेंडी नृत्य तथा सुरेश भाई ने गुजरात का डांग नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को रोमांचित कर खूब तालियां बटोरी। संगीत आहूजा ने अवधी लोकगीत ‘अवध में जनमे प्रभु श्री राम बधावा लेकर आयी सखिया’, ‘कुंभ मेलवा का हमको घुमाओ पिया’, ‘आनंद मंगल गायो, आयोध्या में श्री राम जी पधारे’ जैसे गीत पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और भारतीय संगीत की उत्कृष्टता का परिचय दिया। शनिवार को प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यक रीला होता अपनी प्रस्तुति देंगी।

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