पारदर्शिता हो तो ऐसी….

Exclusive उत्तर प्रदेश

आगरा, 8 दिसंबर। पारदर्शिता हो तो ऐसी जैसी उद्यान विभाग बरत रहा है। हुआ ऐसा चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में प्रोन्नति पाने के लिये उद्यान विभाग के एक कर्मचारी ने न्यायालय की शरण ली। उसका कहना था कि विभागीय अधिकारियों द्वारा उनको प्रोन्नति नहीं प्रदान की जा रही है। इन आदेशों का पालन तो करना ही था।
गत दिवस उपनिदेशक उद्यान कार्यालय में इन तीन चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का टाइप टेस्ट लिया गया। इसके लिये राजकीय औद्योगिक संस्थान बल्केश्वर से सीनियर इंस्ट्रक्टर श्री सिंघल को बुलाया गया। उनके द्वारा यह टाइप टेस्ट पांच मिनट का लिया गया।जिसमें तीनों कर्मचारियों को बताया गया कि वे अपने मोबाइल फोन स्विच आफ कर लें। टाइप राइटर को चेक कर लें। इसके पश्चात पांच मिनट का टाइप टेस्ट शुरू किया।श्री सिंघल के अलावा चयन समिति के तीन अन्य सदस्य वहां मौजूद रहे। जिनमें स्वयं उपनिदेशक उद्यान डीपी सिंह यादव, उद्यान अधीक्षक रजनीश पांडे व एक अन्य अधिकारी । इनके द्वारा पांच मिनट के टाइपिंग टेस्ट की वीडियो भी बनवायी जिससे चयन समिति पर कोई आरोप न लग सके।
इसके पश्चात एक्सपर्ट ने टाइप की हुई तीनों कापियों को जांचा। जिसमें जिस कर्मचारी ने न्यायालय से मांग की थी, उसके तो शून्य अंक आये। बाकी दो भी कुछ खास नहीं कर पाये। यानी कि तीनों ही टाइप टेस्ट में फेल हो गये।  इनको एक मिनट में 25 शब्द टाइप करने के निर्देश दिये गये थे। इसके पश्चात चयन समिति द्वारा रिजल्ट को बाकायदा सील कर दिया गया। जिससे कि किसी को कुछ भी पता नहीं चल सके। हालांकि इन कर्मचारियों को मौखिक रूप से बता दिया गया कि वे अभी और मेहनत करें। टाइपिंग टेस्ट पास करें। विभागीय अधिकारियों ने मामले में पारदर्शिता इतनी बरती कि बाकायदा एग्जामिनर ने सील लगाकर रिजल्ट को अपने समक्ष ही सील कराया। एक प्रति वे खुद भी अपने साथ लेकर चले गये।

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