​”डेटा और क्लाउड पर हमारा हक हो”: जीत अदाणी ने भारत की डिजिटल संप्रभुता के लिए पेश किया 3-पॉइंट फॉर्मूला

Business

मुंबई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सदी में भारत को सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि उसे बनाने और नियंत्रित करने वाला राष्ट्र बनना होगा। यह बात अदाणी ग्रुप के डायरेक्टर जीत अदाणीi ने इंडिया AI समिट 2026 में कही। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि AI अब केवल तकनीकी बदलाव नहीं है बल्कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता, आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का नया आधार बनने जा रहा है।

इस दौरान उन्होंने अदाणी ग्रुप के चेयरमैन द्वारा हाल ही में की गई 8.3 लाख करोड़ रुपये निवेश की घोषणा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह निवेश भारत में ग्रीन एनर्जी आधारित AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए है, जो देश को AI के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे भारत के तकनीकी इतिहास का एक परिवर्तनकारी कदम बताया।

जीत अदाणी ने कहा कि इतिहास में हर युग को एक तकनीक ने परिभाषित किया है। बिजली ने उद्योगों को गति दी, तेल ने वैश्विक राजनीति की दिशा तय की और इंटरनेट ने पूरी अर्थव्यवस्था को बदल दिया। अब वही भूमिका AI निभाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के सामने असली सवाल यह नहीं है कि वह AI अपनाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि भारत अपनी बुद्धिमत्ता खुद बनाएगा या दूसरे देशों की बनाई प्रणाली पर निर्भर रहेगा।

उन्होंने ये भी कहा कि भारत का उदय किसी पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए नहीं है, बल्कि दुनिया में संतुलन और स्थिरता लाने के लिए है। भारत जब तकनीक बनाता है तो उसका उद्देश्य नियंत्रण नहीं, बल्कि समावेश होता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि क्षमता के बिना समावेश कमजोरी बन जाता है और संप्रभुता के बिना क्षमता विदेशी निर्भरता में बदल जाती है। जीत अदाणी ने भारत की AI शक्ति के तीन प्रमुख स्तंभ बताए- सम्पूर्ण ऊर्जा, क्लाउड पर संप्रभुता और असीमित सेवा।

उन्होंने कहा कि AI को चलाने के लिए सबसे जरूरी चीज बिजली है। AI सिस्टम भारी मात्रा में ऊर्जा का उपयोग करते हैं और अगर बिजली व्यवस्था कमजोर होगी तो देश की AI क्षमता भी कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि भारत में सोलर और विंड एनर्जी का विस्तार अब केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं है बल्कि यह राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में देश में ऐसे बड़े केंद्र विकसित होंगे जहां ग्रीन एनर्जी और AI डाटा सेंटर एक साथ काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ क्लाउड है। पहले देश अपनी सुरक्षा के लिए सेना और नौसेना बनाते थे, आज के डिजिटल युग में डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं। अगर भारत का डेटा और AI सिस्टम विदेशों में रहेगा तो भारत की रणनीतिक ताकत भी बाहरी नियंत्रण में रहेगी। इसलिए भारत को अपने देश में ही बड़े पैमाने पर डाटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा, ताकि देश की डिजिटल संप्रभुता सुरक्षित रह सके। तीसरे स्तंभ के रूप में उन्होंने सेवाओं की संप्रभुता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि IT क्रांति के दौरान भारत ने पूरी दुनिया को सेवाएं दीं, लेकिन उसका आर्थिक लाभ ज्यादा भारत के बाहर गया। AI भारत को यह स्थिति बदलने का ऐतिहासिक अवसर दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का AI सबसे पहले भारतीय किसानों की मदद करे, शिक्षा को बेहतर बनाए, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करे, लॉजिस्टिक्स और उद्योग को अधिक सक्षम बनाए और छोटे शहरों और गांवों तक विकास पहुंचाए।

जीत अदाणी ने भावनात्मक अंदाज में कहा कि उनकी पीढ़ी को आजादी विरासत में मिली है, लेकिन अब उसे मजबूत और सुरक्षित करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक राष्ट्रवाद का मतलब केवल शब्द नहीं, बल्कि क्षमता, मजबूती और क्रियान्वयन है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली AI सदी भारत की पहचान के साथ जुड़ी होगी। उन्होंने कहा कि भारत केवल इस बदलाव का हिस्सा नहीं बनेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा। भारत का लक्ष्य दुनिया को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उसे स्थिरता देना और ऐसी तकनीक बनाना है जो पूरी मानवता के लिए उपयोगी हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *